दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर शुक्रवार को हुई सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं और फिर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने साफ किया कि फिलहाल आदेश पर रोक या किसी नए निर्देश का ऐलान नहीं किया जाएगा और अंतिम निर्णय सुनाए जाने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़ने का आदेश दिया था। उस आदेश के बाद से ही यह मामला जनमानस के बीच संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के सामने आते ही दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर विरोध और समर्थन में लामबंदी शुरू हो गई। एक ओर स्थानीय निवासियों का कहना है कि हाल के महीनों में आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़े हैं, जिनकी वजह से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है। कई घटनाओं में मासूम बच्चों की जान तक चली गई है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को इस समस्या से निपटने के लिए कठोर कदम उठाने ही होंगे। स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों का मानना है कि बेकाबू होते जा रहे इन कुत्तों को पकड़ना ही एकमात्र विकल्प है, जिससे नागरिकों को राहत मिल सकेगी।
दूसरी ओर, पशु अधिकार कार्यकर्ता और कई सामाजिक संगठन इस कदम को अमानवीय बताते हुए विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुत्तों को पकड़ना या हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार और प्रशासन को आवारा कुत्तों के लिए टीकाकरण, नसबंदी और उचित आश्रय स्थलों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि इंसानों और जानवरों के बीच संतुलन कायम रहे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि आवारा कुत्तों को हटाने के नाम पर अक्सर उनके साथ क्रूरता की जाती है, जो संविधान और कानून दोनों के खिलाफ है।
दिल्ली-एनसीआर में इस मुद्दे को लेकर माहौल बेहद गरम है। एक तरफ लोग सुरक्षा और जीवन की चिंता को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, तो दूसरी ओर पशु अधिकारों की रक्षा करने वाले कार्यकर्ता अदालत के आदेश को चुनौती दे रहे हैं। अदालत ने हालांकि इस मामले पर तुरंत कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है, लेकिन तीन जजों की पीठ द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिक गई हैं। यह फैसला न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर, बल्कि पूरे देश में इंसानों और आवारा जानवरों के बीच तालमेल और अधिकारों की बहस को नई दिशा देगा।
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