राजधानी पटना एक बार फिर मानसून की चंद घंटों की बारिश में बेहाल हो गया है। नीतीश कुमार के सरकार द्वारा प्रचारित “विकास मॉडल” और नगर निगम की सफाई व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई, जब रविवार रात से हुई तेज बारिश ने पूरा शहर जलमग्न कर दिया। सड़कें दरिया बन गईं और मोहल्लों में घरों के अंदर तक पानी घुस गया।
इस बारिश ने न सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दावों की सच्चाई उजागर ना की, बल्कि पटना की मेयर सीता साहू की ‘चकाचक पटना’ और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की सच्चाई भी सामने ला दी। सोशल मीडिया पर लोग तंज कसते नजर आ रहे हैं – “पटना स्मार्ट सिटी नहीं, वाटर सिटी बन गया है।”
निचले इलाकों में बुरा हाल
कंकड़बाग, राजेंद्र नगर,मुसल्लहपुर हाट, बाजार समित, गोला रोड, कदमकुआं, बोरिंग रोड जैसे प्रमुख इलाकों में जलजमाव ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप कर दी। कई जगहों पर स्कूल बंद करने पड़े, लोग ऑफिस नहीं जा सके और एंबुलेंस तक फंस गईं। कुछ इलाकों में बिजली की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
सीता साहू के दावे हुए ध्वस्त
कुछ ही दिन पहले मेयर सीता साहू ने पूरे पटना में ‘चकाचक सफाई अभियान’ के तहत नालों की सफाई की बात कही थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि नाले ओवरफ्लो कर रहे हैं और कई जगहों पर कचरे की वजह से जलनिकासी पूरी तरह से बंद हो गई है।
जनता में आक्रोश
स्थानीय निवासी अब सरकार और नगर निगम से सवाल कर रहे हैं – “हर साल करोड़ों रुपये जल-निकासी और सफाई पर खर्च होते हैं, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।”
शहरवासियों का कहना है कि जब कुछ घंटों की बारिश में ही ये हाल है, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
प्रशासन की सफाई
नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग ने दावा किया है कि पंपिंग स्टेशनों को सक्रिय किया गया है और जल्द ही जलजमाव की समस्या पर काबू पा लिया जाएगा। लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है।
पटना की यह तस्वीर साफ करती है कि विकास सिर्फ कागजों पर है और जमीन पर आम आदमी आज भी पानी में डूबा हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक जनता इस ‘विकास’ की भारी कीमत यूं ही चुकाती रहेगी?
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