पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर के बाद पीड़ित परिवारों ने राहत तो जताई, लेकिन उनका दर्द अब भी जस का तस है। जानिए क्या बोले शोकसंतप्त परिजन।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान जाने के तीन महीने बाद अब कथित मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर ने पीड़ित परिवारों के दिल में थोड़ी राहत जरूर पहुंचाई है, लेकिन उनका ग़म और गुस्सा अभी भी जीवित है। इस हमले ने देशभर को झकझोर कर रख दिया था, जब तीर्थयात्रियों से भरी बस पर किए गए अचानक हमले में मासूमों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले का मास्टरमाइंड बशीर अहमद लोन को एक मुठभेड़ में मार गिराया गया है। बताया जा रहा है कि लोन पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहा था और हमले की योजना सीमा पार बैठकर रची गई थी। सुरक्षा बलों को लंबे समय से उसकी तलाश थी, और हाल ही में अनंतनाग जिले में उसे घेरकर मार गिराया गया।
मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, पीड़ित परिवारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। जम्मू, पंजाब और हरियाणा के कई परिवारों ने कहा कि उन्हें संतोष है कि उनके अपनों की मौत का बदला लिया गया, लेकिन यह भी सवाल उठाया कि इतनी देर क्यों लगी? जम्मू की एक विधवा ने कहा, “जिसने मेरा घर उजाड़ा, वो अब मिट गया, मगर मेरी बेटी अपने पिता को हमेशा के लिए खो चुकी है।”
कई परिजनों ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति के मारे जाने से पूरा सच खत्म नहीं होता। हमले की साजिश में शामिल दूसरे चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है। कुछ परिवारों ने सरकार से अपील की कि सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाए ताकि भविष्य में कोई और मां अपने बेटे को यूं खो न दे। साथ ही, उन्होंने मुआवज़े और पुनर्वास की प्रक्रिया में आ रही देरी पर भी नाराज़गी जताई।
यह खबर भले ही आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही हो, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह अंत नहीं है। वे अब भी जवाब चाहते हैं—क्यों उनके अपनों को मारा गया, कैसे ये हमलावर सीमा पार से आते हैं और कब तक निर्दोष लोग इन घटनाओं का शिकार बनते रहेंगे। पहलगाम की धरती पर बहे खून की टीस आज भी उन परिवारों के दिलों में जिंदा है, और मास्टरमाइंड की मौत से यह घाव शायद थोड़ी राहत पा सके, मगर पूरी तरह भर नहीं सकता।
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