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ऑपरेशन सिन्दूर: पहलगाम से पाकिस्तान तक – एक 1त्रासदी और प्रतिशोध की कहानी

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Vishal
December 11, 2025
ऑपरेशन सिन्दूर: पहलगाम से पाकिस्तान तक – एक 1त्रासदी और प्रतिशोध की कहानी

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव समय-समय पर हिंसक मोड़ लेता रहा है, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला एक ऐसा मोड़ था, जिसने न केवल देश को झकझोर कर रख दिया, बल्कि भारत सरकार को सख्त सैन्य प्रतिकार की ओर भी प्रेरित किया। इसी हमले के प्रतिशोधस्वरूप भारत सरकार ने 7 मई 2025 को “ऑपरेशन सिन्दूर” की शुरुआत की – एक सटीक, तीव्र और संदेशात्मक सैन्य कार्रवाई जो पाकिस्तान के अंदर तक गई और आतंक के अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया। यह ऑपरेशन न केवल एक सैन्य अभियान था, बल्कि यह पीड़ितों के न्याय की लड़ाई भी थी।


पहलगाम का नरसंहार – 22 अप्रैल 2025

22 अप्रैल 2025 की सुबह जम्मू-कश्मीर के सुरम्य पर्यटन स्थल पहलगाम के बाइसारन घाटी में एक सामान्य दिन जैसा ही प्रतीत हो रहा था। टूरिस्टों की चहल-पहल, घोड़े की सवारी, लोकल गाइड्स की हँसी-मजाक – सब कुछ वैसा ही था जैसा हर साल की गर्मियों में होता था। लेकिन दोपहर करीब 1:15 बजे स्थिति अचानक भयावह हो गई। अज्ञात आतंकियों ने भारी हथियारों से लैस होकर पर्यटकों पर हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने कुछ पर्यटकों से उनके पहचान पत्र मांगे और विशेष रूप से हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाते हुए गोलीबारी की। इस निर्मम हमले में 26 लोगों की मौत हुई – जिनमें अधिकांश पुरुष थे, जो अपने परिवारों के साथ छुट्टियाँ मनाने आए थे। हमलावरों ने महिलाओं और बच्चों को कुछ हद तक बख्शा, लेकिन अपनों की लाशों के बीच जीवित रहना किसी सजा से कम नहीं था।

इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का छद्म नाम माना जाता है। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान में स्थित आतंकी लॉन्‍च पैड्स और प्रशिक्षण शिविरों की सक्रियता को चिन्हित करना शुरू किया।


सिन्दूर का अर्थ – एक सांस्कृतिक प्रतीक

भारत सरकार द्वारा इस जवाबी सैन्य कार्रवाई का नाम रखा गया – “ऑपरेशन सिन्दूर”। यह नाम केवल सैन्य योजना का कोड नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रतीक भी था। हिंदू संस्कृति में सिन्दूर विवाहित स्त्री के सुहाग का प्रतीक होता है। पहलगाम हमले में मारे गए पुरुषों की विधवाओं के माथे से सिन्दूर छिन गया था – और यह ऑपरेशन उसी शोक और आक्रोश की परिणति थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अप्रैल को आयोजित सर्वदलीय बैठक में अपने संबोधन में कहा, “ये ऑपरेशन केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई नहीं है, यह उन महिलाओं की मांग का जवाब है जिनका सुहाग छिन गया। हम आतंक के हर चेहरे को ध्वस्त करेंगे।”


ऑपरेशन सिन्दूर की योजना और क्रियान्वयन

हमले के तीन दिन बाद, 25 अप्रैल 2025 को, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), थल सेना, वायुसेना, नौसेना, और RAW के प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। भारत के पास पहले से ही उन आतंकवादी ठिकानों की सूची थी जो पाकिस्तान में सक्रिय थे और जिन्हें हाल ही में अपडेट किया गया था।

7 मई 2025 को तड़के 3:45 बजे, भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिन्दूर को अंजाम देना शुरू किया। फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों ने जम्मू, पठानकोट और श्रीनगर एयरबेस से उड़ान भरी और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गए।

राफेल विमानों ने SCALP क्रूज मिसाइल, AASM ‘हैमर’ गाइडेड बम और S-400 एयर डिफेंस के समन्वय से अत्यंत सटीक बमबारी की। प्रमुख लक्ष्य थे:

  1. मुरिदके – लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय, लाहौर के पास
  2. बहावलपुर – जैश-ए-मोहम्मद की कमान, जहां मौलाना मसूद अजहर के सहयोगी सक्रिय थे
  3. कोटली – पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित प्रमुख ट्रेनिंग कैम्प
  4. मुज़फ्फराबाद – लॉन्‍च पैड्स और रसद केंद्र
  5. बाग़, रावलकोट, और नीलम घाटी – सीमावर्ती ठिकाने

हमले केवल 23 मिनट के भीतर समाप्त कर लिए गए और सभी भारतीय विमान सुरक्षित लौट आए। रक्षा विश्लेषकों ने इस ऑपरेशन को ‘सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 से कहीं अधिक सटीक और जोखिमपूर्ण’ बताया।


हताहत और विनाश का अनुमान

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ऑपरेशन में कई आतंकवादी मारे गए, जिनमें जैश और लश्कर के कई उच्च रैंकिंग कमांडर शामिल थे। हालांकि आधिकारिक संख्या को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया है, रक्षा सूत्रों ने मीडिया में बताया कि संख्या 60 से 70 के बीच हो सकती है। वहीं पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक ठिकानों पर हमला किया, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई – इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

हालांकि भारत ने स्पष्ट किया कि हमले पूर्व-चिन्हित सैन्य और आतंकी ठिकानों पर किए गए थे और नागरिक हताहतों से बचने की हर संभव कोशिश की गई।


पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

8 मई को पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर जवाबी गोलाबारी शुरू की। उरी, केरन, पुंछ और राजौरी सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से भारी मोर्टार फायरिंग हुई, जिसमें भारतीय सेना के 4 जवान शहीद हुए और 2 आम नागरिकों की जान चली गई। जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की चौकियों को लक्षित कर ध्वस्त किया।

सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया और दोनों देशों ने अपने हवाई क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी। पाकिस्तान ने अपने सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया, जबकि भारत ने भी दिल्ली, अमृतसर और श्रीनगर एयरस्पेस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

भारत-पाक संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तीव्र प्रतिक्रिया आई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। अमेरिका ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया लेकिन क्षेत्रीय शांति की आवश्यकता पर बल दिया।

रूस और फ्रांस ने भारत के पक्ष में बयान दिए, जबकि चीन ने तटस्थ रुख अपनाया और ‘संवाद और कूटनीति’ की बात की। इस बीच, यूरोपीय यूनियन के कुछ देशों ने नागरिकों की मौत पर चिंता जताई और ‘स्वतंत्र जांच’ की मांग की।


राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

ऑपरेशन सिन्दूर ने भारत में एकजुटता की लहर पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर #OperationSindoor और #JusticeForPahalgamVictims जैसे हैशटैग ट्विटर और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगे, जिन्हें लाखों बार साझा किया गया। विभिन्न राज्यों में शोक सभाएँ आयोजित हुईं और शहीदों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणाएँ की गईं।

प्रधानमंत्री ने 9 मई को उच्चस्तरीय बैठक के बाद एक सार्वजनिक संबोधन में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में जाकर घायलों से मुलाकात की और पुष्पांजलि समारोह में भाग लिया।


निष्कर्ष: प्रतिशोध नहीं, न्याय

ऑपरेशन सिन्दूर कोई युद्धोन्माद नहीं था। यह एक संतुलित, रणनीतिक और नैतिक प्रतिक्रिया थी – उस अमानवीयता के खिलाफ जिसने निर्दोष नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया। यह ऑपरेशन केवल पाकिस्तान को चेतावनी नहीं थी, यह दुनिया को यह संदेश भी था कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले पर चुप नहीं बैठेगा।

जहाँ पहलगाम में बहा खून, वहाँ से उठी एक पुकार थी – न्याय की। ऑपरेशन सिन्दूर उसी पुकार का जवाब था। यह कहानी त्रासदी और प्रतिशोध की नहीं, बल्कि एक देश के आत्मसम्मान, पीड़ितों के लिए न्याय और आतंक के खिलाफ एकजुटता की कहानी है।


लेखक: [विशाल रघुवंशी]
प्रकाशित: prwalapatrakar.com

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