राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-PG) 2017 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले डॉक्टर नवदीप सिंह की आत्महत्या को अब 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनकी मौत के पीछे की सच्चाई अभी भी रहस्य बनी हुई है। देश भर में टॉपर बनने वाले इस प्रतिभाशाली युवा डॉक्टर की जिंदगी का अचानक यूं खत्म हो जाना न सिर्फ उनके परिजनों के लिए बल्कि पूरे मेडिकल समुदाय के लिए गहरा सदमा बन गया है।
सितंबर 2024 में दिल्ली स्थित उनके फ्लैट में नवदीप सिंह का शव फंदे से लटका मिला था। शुरू में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला मानते हुए औपचारिक जांच शुरू की थी, लेकिन कोई ठोस कारण सामने नहीं आ पाया। नवदीप के पास से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ, जिससे यह और भी अस्पष्ट हो गया कि उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया।
नवदीप सिंह ने बेहद कम उम्र में वो उपलब्धि हासिल की थी, जिसकी कामना लाखों छात्र करते हैं। उनके सहपाठी और जानने वाले उन्हें मेहनती, संवेदनशील और शांत स्वभाव का बताते हैं। उनके करीबी दोस्तों का मानना है कि वे किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी को इस बारे में बताया नहीं।
परिवार का कहना है कि नवदीप के साथ कुछ ऐसा ज़रूर हुआ होगा जिसे वह अकेले झेल रहे थे। उनकी मां ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें आज भी यह समझ नहीं आता कि एक होनहार बेटा, जो देश का टॉपर था, अचानक आत्महत्या क्यों करेगा। उन्होंने निष्पक्ष और तेज़ जांच की मांग की है।
दिल्ली पुलिस ने मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है और जांच प्रक्रिया बेहद धीमी बताई जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया ऐक्टिविटी की जांच के बावजूद किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचा जा सका है। इससे परिजन और जनता के बीच निराशा बढ़ रही है।
देश भर के मेडिकल छात्रों और नवदीप के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर #JusticeForNavdeep अभियान चलाया था, लेकिन 10 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक इस पर कोई ठोस जवाब नहीं आया है। सवाल यह उठता है कि जब देश का टॉप रैंक होल्डर भी न्याय के लिए भटक रहा है, तो आम छात्रों की स्थिति क्या होगी?
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