दरभंगा जिले के ग्रामीण क्षेत्र नेहरा रजवाड़ा की तकरीबन 14 हजार की आबादी पिछले कई सालों से जल संकट से जूझ रही है। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल-जल योजना” इस बस्ती तक आज तक नहीं पहुँच पाई है। हालत यह हो गई कि वहां के चापाकलों का पानी भी पूरी तरह सूख चुका है। बस्ती में केवल एक जगह से हल्के-हल्के पानी की धारा निकलती है, जहाँ दूर-दूर से लोग घंटों इंतजार करके अपनी प्यास बुझाने आते हैं। इतना ही नहीं, कभी-कभार पानी का टैंकर भेजा भी जाता है, तो उसके बदले हर घर से 200 रुपये की मांग की जाती है। ऐसे में गरीब और मजदूर तबके के लोग भारी कठिनाई का सामना कर रहे थे।
इसी जल संकट की भयावहता को उजागर करने के लिए मीडिया प्लेटफॉर्म ‘द पंचायत’ के सीईओ आदित्य कुमार खुद दरभंगा के इस क्षेत्र में पहुंचे। ‘द पंचायत’ इन दिनों बिहार के अलग-अलग विधानसभाओं का दौरा कर रहा है, जहाँ वे आम लोगों से उनकी समस्याएं जानने के साथ-साथ, उनके जनप्रतिनिधियों के 5 साल के कार्यकाल का आकलन भी कर रहे हैं। जब वे नेहरा रजवाड़ा पहुँचे, तो उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि नलों में पिछले 5 सालों से पानी नहीं आ रहा और एक-दो महीने पहले तक जो चापाकल थोड़ा-बहुत सहारा था, वो भी सूख गया।
ग्रामीणों की इन तकलीफों का वीडियो जैसे ही ‘द पंचायत’ ने सोशल मीडिया पर साझा किया, इसका असर तुरंत दिखाई देने लगा। रातों-रात स्थानीय विधायक उस बस्ती में पहुंचे और लोगों को पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। विधायक ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही इस काम की नियमित निगरानी करने और उसमें लापरवाही ना बरतने की हिदायत भी दी।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जब पत्रकारिता ईमानदारी और जनहित को प्राथमिकता बनाकर काम करती है, तो वह सत्ता को जवाबदेह बनाने की ताकत रखती है। ‘द पंचायत’ की इस पहल ने 14 हजार लोगों की आवाज को मंच दिया और उनकी वर्षों पुरानी जल समस्या को सरकार के सामने मजबूती से रखा। यही है पत्रकारिता का असली उद्देश्य – जन की बात को जनप्रतिनिधियों तक पहुँचाना और समाधान की दिशा में बदलाव लाना।
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