12 अगस्त 2025 — शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल के तहत, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 11वीं–12वीं की ‘लीगल स्टडीज’ (Legal Studies) पाठ्यवस्तु में व्यापक संशोधन का निर्णय लिया है। इसमें विवादास्पद और पुराने भारतीय कानून जैसे कि त्रिपल तलाक, राजद्रोह और धारा 377 को हटाकर नए, नागरिक-केंद्रित कानूनों और सुधारों को शामिल किया जाएगा।
संशोधित पाठ्यक्रम में अब शामिल होंगे:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), जो अब भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह लेगी,
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), जो आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह आयेगी,
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) का उत्तराधिकारी है।
इन बड़े बदलावों का उद्देश्य छात्रों को भारत के आधुनिक, न्यायोन्मुख कानूनी ढांचे और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। साथ ही, पाठ्यक्रम को NEP 2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020) के अनुरूप रोचक और व्यावहारिक ढंग से प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है.
यह प्रस्ताव बोर्ड की पाठ्यक्रम समिति द्वारा मंजूर, और जून 2025 में शासी निकाय द्वारा अनुमोदित किया गया था। इसके क्रियान्वयन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी और आवश्यकतानुसार एक सामग्री विकास एजेंसी से भी सहयोग लिया जा सकता है। पाठ्यपुस्तकों की पुनर्लेखन प्रक्रिया को पूरा कर शैक्षणिक सत्र 2026–27 तक लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।CBSE लीगल स्टडीज सिलेबस बदलाव
इस बदलाव से कानून, सार्वजनिक नीति और प्रशासन में रूचि रखने वाले छात्रों को आधुनिक न्याय व्यवस्था की समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी और उन्हें वर्तमान कानूनी परिदृश्य की बेहतर जानकारी प्राप्त होगी।
Leave a Reply