लिट्टी- चोखा के साथ जहाँ शाम बनता है,
छठ पर्व का जहाँ धूम- धाम से त्योहार मनता है।
जहाँ धाराएँ बहती है पवित्रोतम् माँ गंगा की
इसी से तो हमारा ‘बहार- ए- बिहार’ बनता है।।
धरोहरो का है केंद्र, राजगीर की हसीन वादियाँ,
नालंदा- विक्रमशिला हो, या गीतों वाली शादियाँ।
बौद्ध- जैन की उदयभूमि, ज्ञान का भंडार जहाँ
मौर्य- चाणक्य की राजभूमि, मंदार मधुसूदन का धाम यहाँ।।
अरे, पर्वो मे जहाँ ठेकुए- खाजे का मिष्ठान सजता है।
इसी से तो हमारा ‘बहार- ए- बिहार’ बनता है।।
धरती जहाँ की अन्नपूर्णा, मधुबनी की चित्रकलाएँ यहाँ,
लीची- आम चर्चित जहाँ की, माँ मुंडेश्वरी का मिलता आशीर्वाद यहाँ।
गांधी के ‘सत्याग्रह’ की नींव यही है, गुरु गोविंद सिंह थे जन्मे यहाँ
राजनीति का गढ़ यह है, हर व्यक्ति आधा नेता जहाँ।।
अरे, गंगा- कोसी से होता, पवित्र अभिषेक जिसका है।
इसी सब से तो, ‘बहार- ए- बिहार’ बनता है।।
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