दिग्गज दक्षिण भारतीय अभिनेत्री बी. सरोजा देवी का 14 जुलाई 2025 को मल्लेस्वराज़, बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर निधन हो गया। वे 87 वर्ष की थीं और उनके निधन का कारण आयु-वर्षजनित स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बताई गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
अभिनय की शुरुआत और भाषाई बहुमुखी प्रतिभा
जनवरी 1938 में जन्मी सरोजा देवी ने मात्र 17 वर्ष की आयु में कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदासा (1955) के साथ अपना अभिनय जीवन शुरू किया, जिससे उन्होंने राष्ट्रीय पहचान पाई. उन्होंने न केवल कन्नड़, बल्कि तमिल, तेलुगु और हिंदी भाषा की फिल्मों में भी अपने अभिनय का जादू बिखेरा। अनेक विश्लेषकों द्वारा उन्हें “अभिनय सरस्वती” और “कन्नड़ाच्चु पैंगिली” जैसे शीर्षक दिए गए.
पुरस्कार एवं सम्मान
कला जगत में उनके अतुलनीय योगदान को समझते हुए उन्हें 1969 में पद्मश्री और 1992 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया । इसके अतिरिक्त, कर्नाटक एवं तमिलनाडु सरकार की ओर से कई वरिष्ठ नागरिक सम्मान और विशिष्ट सम्मान, जैसे– बंगलौर विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट और कला-स्तरीय पुरस्कार भी प्रदान किए गए ।
यादगार फिल्में व करियर की विशेषताएँ
सरोजा देवी की फिल्मी यात्रा साठ वर्षों से अधिक समय तक चली जिसमें उन्होंने नादोडी मनन (1958), पंढुरंगा महात्म, कित्तूर रानी चेननम्मा, भक्त कनकदास, कास्तूरी निवास आदि जैसी दर्जनों उल्लेखनीय फिल्मों में अभिनय किया । वह अकेली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने 1955 से 1984 तक लगातार 161 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई.
विनम्रता, सामाजिक प्रतिबद्धता और पारिवारिक जीवन
कर्नाटक में परिवार के साथ बसती सरोजा देवी समाज सेवा में भी सक्रिय थीं—विरासत के तौर पर धन-समर्थन शिविरों का आयोजन करती रहीं और चैरिटेबल ट्रस्ट, स्वास्थ्य व पुनर्वास केंद्रों का संचालन भी करती रहीं । उन्होंने अपनी भतीजी को गोद भी लिया, जिनकी स्मृति में साहित्यिक पुरस्कार की स्थापना की गई ।
दिग्गजों और प्रशंसकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। अभिनेता-राजनीतिज्ञ रजनीकांत ने ट्विटर पर शांति की कामना की, वहीं अभिनेत्री–राजनीतिज्ञ खुशबू सुंदर ने लिखा:
“An era gold golden cinema comes to an end. #SarojaDevi amma was the greatest of all times…”
वरिष्ठ तमिल अभिनेता कमल हसन भावुक हो गए और कहा कि उन्होंने सरोजा देवी को अपना “दूसरी माँ” माना । शिव राजकुमार, सदूप, दरशन, विजय सेतुपति, राम्या, सीमन जैसे अनेक कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और बेंगलुरु स्थित उनके निवास पर अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की ।
बी. सरोजा देवी का निधन भारतीय सिनेमा के ‘स्वर्णिम युग’ का अंत प्रतीक बन गया है। बेहतरीन अभिनय, भाषाई भारती और सामाजिक संवेदनशीलता के लिए उन्हें सदैव याद रखा जाएगा। वे एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने सिर्फ फिल्मों तक सीमित न रहकर समाज में भी अमूल्य योगदान दिया। उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी फिल्मों और उपलब्धियों के माध्यम से उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।
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